जालंधर, 30 अगस्त . पंजाब में बाढ़ की मार झेल रहे लोगों की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. भाखड़ा, पौंग और रणजीत सागर बांधों के गेट लगातार खुले रहने के कारण राज्य में बाढ़ का दायरा और बढ़ गया है. ताजा हालात के मुताबिक, 10 जिलों के 900 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें से 300 से ज्यादा गांवों में 5 से 8 फीट तक पानी भर गया है. इस बीच, जालंधर में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
मौसम विभाग ने पंजाब में Saturday के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश का दौर जारी रहा तो जालंधर सहित कई जिलों में बाढ़ की स्थिति और भी भयावह हो सकती है. ग्रामीण इलाकों में पानी का स्तर बढ़ने से लोगों की परेशानी दोगुनी हो गई है.
शाहकोट के मंडाला छन्ना गांव में हालात बेहद खराब बताए जा रहे हैं. गांवों में पानी घुसने से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. दो दिन तक बारिश थमने से जहां लोगों को राहत की उम्मीद जगी थी, वहीं अब एक बार फिर से बारिश शुरू होने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं. ग्रामीणों का कहना है कि 2019 और 2023 के बाद अब एक बार फिर बाढ़ ने गांव को तबाह कर दिया है.
हालात का जायजा लेने पहुंचे सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि बाढ़ से करीब 10 से 15 हजार एकड़ जमीन पानी में डूब गई है. किसानों की खड़ी फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है. कई घरों में पानी भर गया है और पशुधन तक डूबने की खबरें सामने आ रही हैं. चन्नी ने ग्रामीणों की पीड़ा समझते हुए कहा कि हर बार बाढ़ आने पर गांव में बना कच्चा बांध टूट जाता है, जिससे हालात और बिगड़ जाते हैं. उन्होंने मांग की कि सरकार को स्थायी समाधान की दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए.
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन का कोई अधिकारी अब तक सही तरीके से जायजा लेने नहीं पहुंचा है. उनका कहना है कि पानी घुसने से उनकी जमीन और घरों को भारी नुकसान हुआ है. कई किसानों ने बताया कि उनके पास सिर्फ 10 किले जमीन ही सुरक्षित बची है, बाकी सब पानी में डूब गई है. लगातार बारिश और बाढ़ से हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं. यदि बारिश का सिलसिला नहीं थमा तो पंजाब में बाढ़ का संकट और गहरा सकता है.
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पीएसके
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