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भारी बारिश से हिमाचल बेहाल, सड़कें ठप, खतरे से ऊपर पौंग बांध का जलस्तर, ऑरेंज अलर्ट

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शिमला, 31 अगस्त (Udaipur Kiran) । हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने पूरे प्रदेश में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग ने आज और आने वाले दो दिनों के लिए भारी से बहुत बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। रविवार सुबह से राजधानी शिमला सहित कई जिलों में जोरदार वर्षा हो रही है। भूस्खलन और नदियों-नालों के उफान से स्थिति और बिगड़ गई है।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, प्रदेश में अब तक तीन नेशनल हाईवे और 819 सड़कें बंद हो चुकी हैं। अकेले चंबा में 253, मंडी में 206, कुल्लू में 175, कांगड़ा में 61, शिमला में 39 और ऊना में 22 सड़कें बंद हैं। कुल्लू के दो और मंडी के एक नेशनल हाईवे पूरी तरह ठप हैं।

भारी बारिश के चलते बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी गहरा असर पड़ा है। प्रदेश में 1,236 ट्रांसफार्मर और 424 पेयजल योजनाएं ठप पड़ी हैं। कुल्लू में 357, चंबा में 296 और मंडी में 177 ट्रांसफार्मर बंद हैं, जबकि कांगड़ा, मंडी, शिमला और अन्य जिलों में पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, बीते 24 घंटों में मलरान में 90 मिलीमीटर, नैना देवी में 82 मिलीमीटर और भटियात में 75 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। शिमला समेत कई जिलों में सुबह से ही तेज बारिश का दौर जारी है।

कांगड़ा जिले में पौंग बांध का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है। रविवार सुबह बांध का स्तर 1391.31 फीट दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 1390 फीट है। बांध से नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन इसके चलते फतेहपुर और इंदौरा उपमंडल के 90 से अधिक गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। खेत और सड़कें डूब गई हैं तथा कई पंचायतों का संपर्क कट गया है। अब तक 1560 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है और राहत शिविर बनाए गए हैं।

उधर, कुल्लू जिले में नग्गर के पास नौंतर और बाड़ नाले में अचानक आई बाढ़ से मनाली-नग्गर-कुल्लू मार्ग बाधित हो गया। प्रशासन ने मार्ग बहाली के लिए मशीनरी तैनात कर दी है। शिमला के विकासनगर में रविवार सुबह भूस्खलन हुआ, जिसमें सड़क पर खड़ी गाड़ी मलबे की चपेट में आ गई। मंडी-कुल्लू मार्ग पर दवाड़ा झलोगी के पास एक एम्बुलेंस अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे जा गिरी और ब्यास नदी में समाने से बाल-बाल बच गई। इस हादसे में एक व्यक्ति घायल हुआ है।

चंबा जिले में मणिमहेश यात्रा के दौरान भरमौर में फंसे करीब 10 हजार श्रद्धालुओं को सुरक्षित चंबा पहुंचा दिया गया है। अब भी विभिन्न स्थानों पर फंसे करीब चार हजार श्रद्धालुओं को निकालने का प्रयास जारी है। वहीं, बिलासपुर जिले में नैना देवी मार्ग भूस्खलन से बंद हो गया है, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कत झेलनी पड़ी है। लोक निर्माण विभाग ने जेसीबी और मजदूरों को सड़क बहाली में लगा दिया है।

लाहौल-स्पीति जिले में चार दिन की राहत के बाद फिर से मौसम खराब हो गया है। रविवार सुबह से हो रही तेज बारिश ने घाटी के हालात एक बार फिर बिगाड़ दिए हैं।

आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मानसून सीजन में अब तक 320 लोगों की मौत हो चुकी है। मंडी में 51, कांगड़ा में 49 और चंबा में 36 लोगों की जान गई है। अब तक 4041 घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिनमें से 824 पूरी तरह ढह गए हैं। अकेले मंडी जिले में 1592 मकानों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा 467 दुकानें और 3646 पशुशालाएं भी तबाह हो चुकी हैं। अब तक 3042 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान दर्ज किया गया है, जिसमें लोक निर्माण विभाग को 1693 करोड़, जलशक्ति विभाग को 1070 करोड़ और ऊर्जा विभाग को 139 करोड़ रुपये की क्षति उठानी पड़ी है।

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(Udaipur Kiran) / उज्जवल शर्मा

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